केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने देशभर में तेजी से बढ़ते कोचिंग उद्योग को नियंत्रित करने के लिए सख्त गाइडलाइन्स जारी की हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। इन नियमों के अनुसार अब कोई भी कोचिंग सेंटर बिना रजिस्ट्रेशन के नहीं चल सकता और सभी संस्थानों को तय समय सीमा के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। सबसे अहम बदलाव यह है कि 16 साल से कम उम्र के छात्रों को कोचिंग में प्रवेश नहीं दिया जा सकेगा, ताकि कम उम्र में पढ़ाई का दबाव कम किया जा सके। नई गाइडलाइन्स में फीस को लेकर भी पारदर्शिता जरूरी की गई है, यानी कोचिंग संस्थान मनमाने शुल्क नहीं ले सकेंगे और उन्हें पूरी जानकारी पहले से देनी होगी। इसके अलावा भ्रामक विज्ञापन या “रैंक गारंटी” जैसे दावे करने पर भी रोक लगा दी गई है। ([Khushal e Kashmir][2]) छात्रों की सुरक्षा के लिए बिल्डिंग, फायर सेफ्टी, पर्याप्त जगह (प्रति छात्र न्यूनतम स्पेस) और साफ-सफाई जैसी सुविधाएं अनिवार्य कर दी गई हैं। ([Khushal e Kashmir][2]) सरकार ने खास तौर पर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया है। अब कोचिंग सेंटरों को काउंसलिंग सुविधा, मनोवैज्ञानिक सहायता और तनाव कम करने वाले माहौल की व्यवस्था करनी होगी, ताकि बढ़ते दबाव और आत्महत्या जैसे मामलों को रोका जा सके। ([Latest news of india][3]) इसके साथ ही पढ़ाई के घंटे, बैच साइज और क्लासरूम वातावरण को भी संतुलित रखने पर जोर दिया गया है। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य कोचिंग सेक्टर को व्यवस्थित करना, छात्रों के हितों की रक्षा करना और शिक्षा प्रणाली में संतुलन बनाए रखना है। सरकार चाहती है कि कोचिंग संस्थान केवल परीक्षा की तैयारी ही नहीं, बल्कि छात्रों के समग्र विकास और सुरक्षित भविष्य में भी योगदान दें।
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