दिनांक: 02 सितंबर, 2025 (मंगलवार) स्थान: गुजरात विश्वविद्यालय – K.S. स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट एंड आईटी युवाओं को सही समय पर सही दिशा देना राष्ट्र के भविष्य को सुनिश्चित करता है। विश्व उद्यमिता दिवस के क्रम में, गुजरात विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित K.S. स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट एंड आईटी में प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए एक विशेष प्रेरणादायक सत्र आयोजित किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए दो प्रतिष्ठित वक्ता—श्री अभयभाई सोलंकी और श्री दीपभाई पटेल—उपस्थित थे। इस सत्र का प्राथमिक उद्देश्य पहली बार कॉलेज आए छात्रों को उद्यमिता (Entrepreneurship) और आत्मनिर्भरता के मूल सिद्धांतों से परिचित कराना था। यह एक औपचारिक व्याख्यान नहीं, बल्कि एक सीधा संवाद था, जिसने छात्रों के मन में उठ रहे हर सवाल का जवाब दिया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि आज के दौर में सफल उद्यम स्थापित करने के लिए तीन चीजें आवश्यक हैं: नवाचार, दृढ़ता, और स्वदेशी विचारधाारा।स्वदेशी विचारधारा और नवाचार: गुजरात विश्वविद्यालय में प्रथम वर्ष के छात्रों को मिली Startup की प्रेरणा
परिचय
स्टार्टअप, नवाचार और स्वदेशी विचारधारा का संगम
श्री अभयभाई सोलंकी ने बताया कि स्टार्टअप एक छोटा कदम नहीं, बल्कि बड़ा बदलाव लाने की शुरुआत है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे समस्याओं को शिकायत के रूप में नहीं, बल्कि बाज़ार के अवसर के रूप में देखें।
रियल-टाइम समाधान: उन्होंने ज़ोर दिया कि छात्रों को ऐसे उत्पादों और सेवाओं पर ध्यान देना चाहिए जो भारत की स्थानीय और विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करते हों।
जोखिम प्रबंधन: स्टार्टअप में जोखिम होते हैं, लेकिन सही योजना और निरंतर सीखने की ललक से इन्हें सफलता में बदला जा सकता है।
श्री दीपभाई पटेल ने छात्रों को स्वदेशी विचारधारा की शक्ति से परिचित कराया। उन्होंने समझाया कि आत्मनिर्भर भारत का मिशन तभी सफल होगा जब हमारे स्टार्टअप स्थानीय संसाधनों और भारतीय प्रतिभा पर आधारित होंगे।
आत्मनिर्भरता की भावना: स्वदेशी का मतलब केवल 'भारत में बना' नहीं है, बल्कि 'भारतीयों द्वारा भारत के लिए' समाधान बनाना है।
वैश्विक मंच पर भारतीयता: उन्होंने कहा कि हमें ऐसी तकनीकें और उत्पाद बनाने चाहिए, जिन पर देश को गर्व हो और जो वैश्विक बाज़ार में भी अपनी अलग पहचान बना सकें।
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता वक्ताओं का सीधा संवाद था। श्री सोलंकी और श्री पटेल ने छात्रों को मंच पर आने और बेझिझक सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित किया। इस इंटरैक्टिव सत्र ने सुनिश्चित किया कि छात्रों के मन में स्टार्टअप, पूंजी और तकनीक से जुड़े सभी भ्रम दूर हों। यह संवाद युवाओं को व्यावहारिक प्रेरणा देने में बेहद सफल रहा।
गुजरात विश्वविद्यालय में आयोजित यह विशेष सत्र, प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए सही मायने में नींव का पत्थर साबित हुआ है। श्री अभयभाई सोलंकी और श्री दीपभाई पटेल के मार्गदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि भारत का युवा वर्ग आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
यदि आप भी अपनी उद्यमशीलता की यात्रा शुरू कर रहे हैं, तो नवाचार को अपना हथियार और स्वदेशी विचारधारा को अपनी प्रेरणा बनाएँ। आज ही अपनी प्रतिभा का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करें!
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