आज के समय में अंतरिक्ष मिशन किसी एक देश तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यह पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी पर आधारित हो चुके हैं। नासा (NASA), यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA), रूस, जापान और अन्य एजेंसियां मिलकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) जैसे प्रोजेक्ट चलाती हैं, जहां एक देश के अंतरिक्ष यात्री दूसरे देश के रॉकेट या मिशन से अंतरिक्ष में जा सकते हैं। इसका मतलब साफ है कि अगर कोई व्यक्ति प्रशिक्षित है और किसी मिशन की जरूरतों को पूरा करता है, तो वह अपने देश के बाहर के स्पेस प्रोग्राम का हिस्सा बन सकता है। यही कारण है कि आज निजी कंपनियां जैसे स्पेसएक्स और एक्सिओम स्पेस भी विभिन्न देशों के नागरिकों को स्पेस मिशन में शामिल कर रही हैं, जिससे अंतरिक्ष पर्यटन और व्यावसायिक उड़ानों का नया युग शुरू हो गया है। भारत की बात करें तो इसका सफर 1984 में शुरू हुआ जब विंग कमांडर राकेश शर्मा सोवियत संघ के ‘सोयुज टी-11’ मिशन के जरिए अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने। इसके बाद भारतीय मूल की कल्पना चावला ने नासा के शटल मिशनों से दुनिया भर में पहचान बनाई, जबकि सुनीता विलियम्स ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर लंबे समय तक रहकर कई रिकॉर्ड बनाए। हाल के वर्षों में सिरीशा बांदला और राजा चारी जैसे भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्रियों ने भी नासा मिशनों में अहम भूमिका निभाई है। एक बड़ा कदम जून 2025 में देखने को मिला जब ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ‘एक्सिओम-4’ मिशन के तहत ISS तक पहुंचे और राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने। चीन और अन्य देश भी अब विदेशी अंतरिक्ष यात्रियों को अपने मिशनों में शामिल करने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे साफ है कि आने वाले समय में अंतरिक्ष पूरी तरह वैश्विक सहयोग का केंद्र बन जाएगा, जहां नागरिकता से ज्यादा महत्व प्रशिक्षण, योग्यता और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का होगा।
Dharmakshetra, Shiv Shakti Mandir, Babu Genu Marg,
Sector 8, Rama Krishna Puram,
New Delhi, Delhi 110022
+91 80031 98250
info@mysba.co.in