भारत-न्यूजीलैंड FTA सस्ते आयात निवेश और रोजगार के नए रास्ते

भारत और न्यूजीलैंड के बीच 27 अप्रैल 2026 को होने वाला मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य व्यापार को आसान बनाना, निवेश बढ़ाना और नए रोजगार के अवसर पैदा करना है। FTA के तहत कई सेक्टर में कस्टम ड्यूटी को खत्म या कम किया जाएगा, जिससे भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। खास बात यह है कि भारत ने अपने किसानों और MSME सेक्टर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डेयरी, कृषि और कुछ औद्योगिक उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है, ताकि घरेलू उद्योग पर नकारात्मक असर न पड़े। इस समझौते से भारत को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं। टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग जैसे श्रम-आधारित क्षेत्रों के उत्पाद न्यूजीलैंड में जीरो ड्यूटी पर निर्यात हो सकेंगे, जिससे इन सेक्टर में उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ेंगे। इसके अलावा न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में करीब 20 अरब डॉलर निवेश का वादा किया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, आईटी और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को मजबूती देगा। भारतीय पेशेवरों के लिए 5,000 वीजा कोटा और 3 साल तक काम करने का अवसर भी इस समझौते का बड़ा आकर्षण है। वहीं सेवाओं के क्षेत्र जैसे आईटी, फाइनेंस और एजुकेशन में भारत की पकड़ और मजबूत होगी। दूसरी तरफ न्यूजीलैंड को भी भारत के बड़े बाजार तक पहुंच मिलेगी। करीब 70% टैरिफ लाइनों पर उसे रियायत दी जाएगी, जिससे उसके उत्पाद जैसे ऊन, लकड़ी, कोयला और कुछ कृषि उत्पाद भारत में आसानी से आ सकेंगे। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को सेब, कीवी, मनुका शहद और समुद्री उत्पाद जैसी चीजें सस्ती मिल सकती हैं। हालांकि, संवेदनशील उत्पादों पर भारत ने कोटा, न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) और अन्य सुरक्षा उपाय लागू किए हैं, ताकि स्थानीय किसानों को नुकसान न हो। कुल मिलाकर, यह FTA भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति को मजबूत करते हुए व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खोलने वाला एक संतुलित और रणनीतिक समझौता माना जा रहा है।

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