राजस्थान में Rajasthan PTET 2026 के लिए इस साल जो तस्वीर सामने आई है, वह चौंकाने वाली है। जहां पहले करीब 8–10 लाख छात्र B.Ed के लिए आवेदन करते थे, वहीं इस बार यह संख्या घटकर लगभग 80 हजार तक रह गई है। यही वजह है कि Vardhman Mahaveer Open University को आवेदन की अंतिम तिथि तीसरी बार बढ़ाकर 5 मई 2026 करनी पड़ी। परीक्षा 14 जून 2026 को प्रस्तावित है, लेकिन इतनी कम संख्या ने शिक्षा क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। अब सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या बदल गया कि एक समय बेहद लोकप्रिय रहा B.Ed कोर्स अब छात्रों की प्राथमिकता से बाहर होता दिख रहा है। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह **नौकरी के अवसरों को लेकर अनिश्चितता** मानी जा रही है। B.Ed करने के बाद सरकारी शिक्षक बनने के लिए लंबी और कठिन प्रक्रिया (REET, भर्ती परीक्षा आदि) से गुजरना पड़ता है, जिसमें सीटें सीमित और प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा होती है। कई बार भर्ती में देरी या पेपर लीक जैसी घटनाओं से भी छात्रों का भरोसा कम हुआ है। इसके अलावा आज के समय में युवाओं का रुझान तेजी से **SSC, बैंकिंग, रेलवे, सिविल सेवा और प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों** की ओर बढ़ रहा है, जहां जल्दी अवसर और बेहतर सैलरी की उम्मीद होती है। टेक्निकल और प्रोफेशनल कोर्स जैसे B.Tech, MBA, डिजिटल स्किल्स भी युवाओं को ज्यादा आकर्षित कर रहे हैं। दूसरी बड़ी वजह है **समय और निवेश बनाम रिटर्न (Return on Investment)**। B.Ed एक अतिरिक्त डिग्री है, जिसमें 2 साल का समय और खर्च लगता है, लेकिन उसके बाद नौकरी की गारंटी नहीं होती। प्राइवेट स्कूलों में सैलरी कम होने के कारण भी कई छात्र इस फील्ड से दूर हो रहे हैं। साथ ही, शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते नियम, बदलती नीतियां और प्रतियोगिता ने भी इसे थोड़ा अनिश्चित बना दिया है। कुल मिलाकर देखा जाए तो B.Ed अब “सुरक्षित करियर” के बजाय “रिस्क वाला विकल्प” बनता जा रहा है—इसी कारण राजस्थान में इसके आवेदन में इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। ---
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