भारत का एविएशन सेक्टर अब एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है, जहां नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा को इंटरनेशनल हब बनाने की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। इस एयरपोर्ट का संचालन अदाणी समूह कर रहा है और इसे ‘हब और स्पोक’ मॉडल पर विकसित करने के लिए सरकार के साथ बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस मॉडल के जरिए भारत के छोटे और मध्यम शहरों से आने वाले यात्रियों को एक बड़े हब (नवी मुंबई) तक लाया जाएगा और वहां से उन्हें सीधे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जोड़ा जाएगा। खास बात यह है कि यात्रियों को बार-बार सामान चेक-इन या कस्टम्स प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा, जिससे यात्रा तेज और आसान हो जाएगी। इस एयरपोर्ट का लक्ष्य 2026-27 में 1.1 करोड़ यात्रियों को सेवा देना और 2028 तक इसे बढ़ाकर 2 करोड़ तक पहुंचाना है, जो दुनिया के सबसे तेज बढ़ते एयरपोर्ट्स में शामिल हो सकता है। सरकार की यह योजना भारत को एक ग्लोबल ट्रांजिट हब बनाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। अभी तक भारत से जाने वाले लगभग 35% अंतरराष्ट्रीय यात्री दुबई, लंदन, दोहा और फ्रैंकफर्ट जैसे विदेशी एयरपोर्ट्स के जरिए ट्रांजिट लेते हैं। सरकार चाहती है कि यह ट्रैफिक अब भारत में ही रुके, जिससे देश को आर्थिक फायदा मिले और भारतीय एयरपोर्ट्स की वैश्विक पहचान मजबूत हो। इसी दिशा में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा को देश का पहला हब एयरपोर्ट बनाने की मंजूरी भी मिल चुकी है, जिसकी शुरुआत 1 जून से होने की उम्मीद है। इसके अलावा केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और राजकोट अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा को भी भविष्य में हब के रूप में विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। अगर यह योजना सफल होती है, तो भारत न सिर्फ अपने यात्रियों के लिए बेहतर और सस्ती कनेक्टिविटी उपलब्ध करा पाएगा, बल्कि वैश्विक एविएशन मैप पर एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभरेगा। नवी मुंबई एयरपोर्ट इस बदलाव का अहम केंद्र बन सकता है, खासकर मुंबई जैसे बड़े आर्थिक शहर के पास होने के कारण। आने वाले समय में यह एयरपोर्ट एशिया और यूरोप के बीच एक प्रमुख कनेक्टिंग पॉइंट बन सकता है, जिससे भारत को पर्यटन, व्यापार और रोजगार के क्षेत्र में भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
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