विदेश में पढ़ाई कर सुनहरा करियर बनाने का सपना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है। यूनाइटेड किंगडम की Kingston University से डिजिटल मीडिया टेक्नोलॉजी में टॉपर रहे 21 वर्षीय Khalid Sharif की कहानी इसी हकीकत को दिखाती है। खालिद ने अपनी पढ़ाई पर करीब 1 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन डिग्री हासिल करने के बाद भी उन्हें 500 से ज्यादा नौकरियों में आवेदन करने के बावजूद एक भी नौकरी नहीं मिल सकी। उन्होंने New York Post को बताया कि वह क्लास में टॉप थे, फिर भी उन्हें सिर्फ 10-20 इंटरव्यू कॉल मिले और हर बार अंतिम चरण में रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। खालिद का कहना है कि समस्या उनकी योग्यता में नहीं बल्कि पूरे जॉब सिस्टम में है। उन्होंने अपनी फील्ड के अलावा सेल्स और अन्य सेक्टर्स में भी आवेदन किया, लेकिन हर जगह भारी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। कोविड के बाद नौकरी बाजार में काफी बदलाव आया हैअब एक ही पोस्ट के लिए हजारों उम्मीदवार आवेदन करते हैं। इसके साथ ही Artificial Intelligence (AI) के बढ़ते उपयोग ने भी कंपनियों की भर्ती नीति को बदल दिया है। कई ऐसे काम, जो पहले इंसानों द्वारा किए जाते थे, अब AI तेजी और कम लागत में कर सकता है, जिससे कंपनियां नई भर्ती करने से बच रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में सिर्फ महंगी डिग्री ही सफलता की गारंटी नहीं है। कंपनियां अब डिग्री से ज्यादा स्किल, प्रैक्टिकल अनुभव और मल्टी-टास्किंग क्षमता को महत्व देती हैं। खालिद की कहानी यह दिखाती है कि ग्लोबल जॉब मार्केट में अनिश्चितता बढ़ गई है और छात्रों को अब पढ़ाई के साथ-साथ नई तकनीकों, स्किल्स और इंडस्ट्री की मांग के अनुसार खुद को लगातार अपडेट करना होगा। वरना लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी नौकरी मिलना मुश्किल हो सकता है।
Dharmakshetra, Shiv Shakti Mandir, Babu Genu Marg,
Sector 8, Rama Krishna Puram,
New Delhi, Delhi 110022
+91 80031 98250
info@mysba.co.in