अप्रैल 2026 में भारतीय शेयर बाजार में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिला, जहां एक तरफ सिक्योरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ने के कारण डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर ब्रेक लगता नजर आया, वहीं दूसरी तरफ इक्विटी यानी कैश सेगमेंट में जबरदस्त तेजी ने निवेशकों को नई दिशा दी। 1 अप्रैल से वायदा (Futures) पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया, जिससे डेरिवेटिव ट्रेडिंग महंगी हो गई और इसका सीधा असर वॉल्यूम पर पड़ा इस सेगमेंट में करीब 6% की गिरावट दर्ज की गई। इसके उलट, मजबूत बाजार रैली के चलते कैश सेगमेंट का औसत दैनिक कारोबार (ADTV) बढ़कर लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो करीब दो साल का उच्च स्तर है। इस तेजी का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी साफ दिखाSensex में 6.9% और Nifty 50 में 7.5% की उछाल आई, जो दिसंबर 2023 के बाद सबसे शानदार प्रदर्शन रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तो और भी ज्यादा जोश दिखा, जहां Nifty Midcap 100 ने 13.6% और Nifty Smallcap 100 ने 18.4% की तेज बढ़त दर्ज की। विशेषज्ञों के अनुसार, डेरिवेटिव ट्रेडिंग आमतौर पर अनुभवी ट्रेडर्स का क्षेत्र होता है, लेकिन टैक्स बढ़ने, नियम सख्त होने और बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव के कारण इसमें भागीदारी कम हुई है। वहीं, बाजार में आई तेजी ने नए और पुराने निवेशकों को फिर से कैश सेगमेंट की ओर आकर्षित किया, जहां वे सीधे शेयर खरीदकर फायदा लेना चाहते हैं। डेरिवेटिव सेगमेंट में गिरावट के बावजूद Bombay Stock Exchange (BSE) ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते हुए पहली बार 50% से ज्यादा मार्केट शेयर हासिल किया, जबकि National Stock Exchange of India (NSE) का वॉल्यूम थोड़ा पीछे रहा। साथ ही, छोटे निवेशकों की भागीदारी में भी कमी आई है—वित्त वर्ष 2026 में NSE के एक्टिव क्लाइंट्स की संख्या 35 लाख घटकर 4.52 करोड़ रह गई, जो यह संकेत देता है कि सख्त नियमों और बढ़ी लागत के कारण छोटे ट्रेडर्स बाजार से दूरी बना रहे हैं। कुल मिलाकर, यह बदलाव दिखाता है कि अब निवेशक जोखिम भरे डेरिवेटिव की बजाय स्थिर और पारदर्शी इक्विटी निवेश की ओर झुक रहे हैं, जिससे बाजार की दिशा और निवेश की रणनीति दोनों में बड़ा बदलाव आ रहा है।
Dharmakshetra, Shiv Shakti Mandir, Babu Genu Marg,
Sector 8, Rama Krishna Puram,
New Delhi, Delhi 110022
+91 80031 98250
info@mysba.co.in