योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पहले उनके मानदेय में बढ़ोतरी की और अब उन्हें सम्मान और पहचान देने के लिए 5 मई 2026 को एक राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह मुख्य कार्यक्रम गोरखपुर में होगा, जहां मुख्यमंत्री स्वयं शामिल होकर शिक्षामित्रों से संवाद करेंगे। इस आयोजन के जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि शिक्षा व्यवस्था की नींव मजबूत करने वाले शिक्षामित्रों की भूमिका को अब औपचारिक रूप से सम्मान दिया जा रहा है। ([AajTak][1]) इस पहल का लाभ करीब 1.43 लाख शिक्षामित्रों को मिलेगा, जो प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं। सरकार ने उनका मानदेय बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुका है। ([AajTak][1]) यह आर्थिक सुधार लंबे समय से चल रही मांगों के बीच एक बड़ा फैसला माना जा रहा है, जिससे शिक्षामित्रों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उनका मनोबल भी बढ़ेगा। कार्यक्रम का आयोजन सुबह 11 बजे होगा और इसकी खास बात यह है कि प्रदेश के सभी जिलों में समानांतर कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा शिक्षामित्र इसमें जुड़ सकें। ([AajTak][1]) सरकार का मानना है कि यह कदम सिर्फ सम्मान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक असर डालेगा। जब शिक्षामित्रों को आर्थिक और सामाजिक पहचान मिलेगी, तो वे स्कूलों में बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। उत्तर प्रदेश सरकार लगातार शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए प्रयास कर रही है, और यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरल शब्दों में, यह कार्यक्रम शिक्षामित्रों के “सम्मान + सशक्तिकरण” दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश है, जो आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत कर सकता है।
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