भारत में चाय उत्पादन पर मौसम की मार साफ दिखाई दे रही है और मार्च 2026 में कुल उत्पादन घटकर 66.86 मिलियन किलोग्राम रह गया, जो पिछले साल के 67.85 मिलियन किलोग्राम से करीब 1.5% कम है। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह उत्तर भारत में उत्पादन का कमजोर होना रहा, जहां उत्पादन 5.8% घटकर 49.05 मिलियन किलोग्राम पर आ गया। खासकर Assam में भारी गिरावट दर्ज की गई, जहां उत्पादन लगभग 39% कम होकर 17.38 मिलियन किलोग्राम रह गया। जलवायु अस्थिरता और मौसम में बदलाव ने यहां चाय बागानों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, जिससे पूरे देश के उत्पादन पर असर पड़ा। हालांकि, कुछ क्षेत्रों से राहत भी मिली है। West Bengal में उत्पादन 37% बढ़कर 29.96 मिलियन किलोग्राम पहुंच गया, जिसमें डुआर्स, तराई और दार्जिलिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों का योगदान रहा। वहीं दक्षिण भारत में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला, जहां Tamil Nadu और Kerala में उत्पादन बढ़ने से कुल उत्पादन 13% बढ़कर 17.81 मिलियन किलोग्राम हो गया। हालांकि कर्नाटक में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन कुल मिलाकर दक्षिण भारत ने स्थिति को संतुलित करने में मदद की। उत्पादन के पैटर्न में भी बदलाव देखने को मिला है, जहां छोटे चाय उत्पादकों की हिस्सेदारी बढ़कर 40.79 मिलियन किलोग्राम हो गई है, जबकि बड़े उत्पादकों का योगदान घटकर 20.07 मिलियन किलोग्राम रह गया। चाय की किस्मों में CTC tea का दबदबा कायम है, जिसका उत्पादन 60.33 मिलियन किलोग्राम रहा, जबकि ऑर्थोडॉक्स और ग्रीन टी का उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहा। कुल मिलाकर, यह गिरावट संकेत देती है कि अगर मौसम से जुड़ी चुनौतियां जारी रहीं, तो आने वाले समय में चाय उद्योग को और दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
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