भारत के सर्विस सेक्टर में अप्रैल 2026 के दौरान शानदार तेजी देखने को मिली है। मजबूत घरेलू मांग, ई-कॉमर्स गतिविधियों में बढ़ोतरी और नए ऑर्डर्स में सुधार के चलते देश का सर्विसेज PMI पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। HSBC द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत का सर्विसेज PMI मार्च के 57.5 से बढ़कर अप्रैल में 58.8 पर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। यह संकेत देता है कि देश की सेवा आधारित अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती पकड़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू बाजार में बढ़ती खपत, डिजिटल सेवाओं का विस्तार और ई-कॉमर्स कारोबार में तेजी ने सर्विस सेक्टर को नई ऊर्जा दी है। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निर्यात मांग में कुछ कमजोरी देखने को मिली, लेकिन घरेलू मांग ने उसकी भरपाई कर दी। Pranjul Bhandari, जो HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री हैं, ने कहा कि अप्रैल में गतिविधियों और नए ऑर्डर्स में मजबूती देखने को मिली है, हालांकि नए निर्यात ऑर्डर्स में नरमी बनी हुई है। इसका अर्थ है कि इस समय भारतीय कंपनियां विदेशी बाजारों की तुलना में घरेलू उपभोक्ताओं पर अधिक निर्भर हो रही हैं। सर्वे के अनुसार ट्रांसपोर्ट, उपभोक्ता सेवाएं, सूचना एवं संचार और ई-कॉमर्स क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। कंपनियों ने बताया कि घरेलू सप्लायर्स की ओर बढ़ते रुझान के कारण ट्रांसपोर्ट गतिविधियों में भी तेजी आई है। वहीं कमजोर इनबाउंड टूरिज्म और पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय मांग प्रभावित हुई है। इसके बावजूद भारत का कंपोजिट PMI भी मार्च के 57.0 से बढ़कर अप्रैल में 58.2 तक पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों में सुधार जारी है और निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। हालांकि इस मजबूत वृद्धि के बीच लागत का दबाव अभी भी उद्योगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। सर्वे के अनुसार खाद्य तेल, गैस, अंडे, मांस, सब्जियों और श्रम लागत में बढ़ोतरी के कारण कंपनियों के ऑपरेटिंग खर्च लगातार बढ़े हैं। हालांकि मार्च की तुलना में इनपुट लागत महंगाई में कुछ कमी जरूर आई, लेकिन यह अब भी नवंबर 2024 के बाद के सबसे ऊंचे स्तरों में बनी हुई है। दिलचस्प बात यह रही कि कंपनियों ने बढ़ती लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला और खुद भी उसका एक हिस्सा वहन किया। इसी कारण आउटपुट प्राइस महंगाई तीन महीनों की सबसे धीमी गति से बढ़ी। दूसरी ओर नए कारोबार में तेजी आने से रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। कंपनियों ने शॉर्ट-टर्म स्टाफ और जूनियर कर्मचारियों की भर्ती में तेजी लाई है, जिससे सभी प्रमुख सेवा क्षेत्रों में रोजगार बढ़ा है। लगातार भर्ती के चलते लंबित काम का बोझ भी कम हुआ है। हालांकि भविष्य को लेकर कंपनियां अभी भी सतर्क हैं और पश्चिम एशिया संघर्ष तथा लगातार बढ़ती लागत को प्रमुख जोखिम मान रही हैं। इसके बावजूद सर्विस सेक्टर की मौजूदा मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
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