बेंगलुरु।
कहते हैं कि सही सोच, परंपरा से जुड़ाव और नवाचार मिल जाए, तो सफलता की कहानी खुद लिखी जाती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है बेंगलुरु के उद्यमी कपल पूजा नादिग और शशांक शिवपुरपु ने, जिन्होंने महज ₹3 लाख के छोटे निवेश से विंटेज साड़ियों का ब्रांड ‘नेरिगे’ शुरू किया और आज यह ब्रांड ₹1 करोड़ प्रति माह की कमाई तक पहुंच चुका है।
पूजा और शशांक ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर भारतीय हथकरघा और पारंपरिक साड़ियों को नया मंच देने का फैसला किया। ‘नेरिगे’ के तहत वे विरासत में मिली और दुर्लभ विंटेज साड़ियों को आधुनिक बाज़ार से जोड़ते हैं। इन साड़ियों की खासियत उनकी अनूठी बुनाई, शुद्ध कपड़ा, पारंपरिक डिज़ाइन और सांस्कृतिक विरासत है, जिसे फैशन प्रेमियों ने हाथोंहाथ अपनाया।
शुरुआत में सीमित संसाधनों और छोटे स्तर पर काम करने के बावजूद, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ब्रांड ने तेज़ी से पहचान बनाई। पारंपरिक कारीगरों से सीधे जुड़ाव और गुणवत्ता पर ज़ोर ने ‘नेरिगे’ को एक भरोसेमंद नाम बना दिया। आज देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी इस ब्रांड की साड़ियों की मांग बढ़ रही है।
यह सफलता सिर्फ आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, स्वदेशी उत्पादों और कारीगरों के सम्मान की कहानी भी है। ‘नेरिगे’ ने यह साबित किया है कि स्वदेशी सोच और उद्यमिता के बल पर न केवल रोज़गार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं, बल्कि वैश्विक बाज़ार में भी अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है।
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