राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित विशाल हिंदू सम्मेलन में ‘स्वदेशी’ को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों ने राष्ट्रहित में स्थानीय उत्पादों को अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
सम्मेलन स्थल पर विशेष रूप से स्वदेशी हाट का आयोजन किया गया, जो आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। यहाँ स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित घरेलू सामान, मिट्टी के बर्तन, हस्तनिर्मित वस्त्र, जैविक खाद्य उत्पाद और पारंपरिक सामग्री के स्टॉल लगाए गए थे। आगंतुकों ने उत्साहपूर्वक इन उत्पादों की खरीदारी की और कारीगरों का उत्साहवर्धन किया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ताओं ने कहा कि “स्वदेशी अपनाना केवल आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति और सनातन संस्कृति के पालन का प्रतीक है।” उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ आह्वान का उल्लेख करते हुए आगामी त्योहारों, जैसे होली, पर चीनी या विदेशी सामान के स्थान पर मिट्टी की पिचकारी, हर्बल गुलाल और स्थानीय मिठाइयों के उपयोग का आग्रह किया।
कार्यक्रम में स्थानीय विद्यालयों के विद्यार्थियों ने ‘स्वदेशी और पर्यावरण’ विषय पर प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया। बच्चों ने स्वदेशी उत्पादों के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन के महत्व को रेखांकित किया।
सम्मेलन के समापन पर उपस्थित हजारों लोगों ने शपथ ली कि वे अपने दैनिक जीवन में भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देंगे, जिससे देश के छोटे उद्यमियों और शिल्पकारों को मजबूती मिल सके।
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