मिडल ईस्ट में युद्ध के कारण दुनिया की महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। हाल की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटों में केवल दो मालवाहक जहाज ही इस मार्ग से गुजरे, जबकि आमतौर पर यहां रोजाना दर्जनों तेल टैंकर गुजरते हैं। मिसाइल और ड्रोन हमलों के डर से शिप ऑपरेटर्स ने जहाज रोक दिए हैं।इस स्थिति का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर भी पड़ रहा है क्योंकि दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से सप्लाई होता है। क्रूड ऑयल की कीमतें 83-84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं और विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जंग लंबी चली और होर्मुज बंद रहा, तो कीमत 120 डॉलर तक जा सकती है।भारत के रक्षा मंत्री ने चेतावनी दी है कि खाड़ी में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकते हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग 167 किमी लंबा है और दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। भारत के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का 10% से अधिक हिस्सा भी इस मार्ग से सप्लाई होता है, जिसमें चावल, चाय, मसाले और इंजीनियरिंग का सामान शामिल है।यह स्थिति दर्शाती है कि वैश्विक तेल और गैस सप्लाई के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कितना अहम है और इस क्षेत्र में अनिश्चितता सीधे अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है।
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