हाल ही में Claude Mythos Preview (CMP) जैसे उन्नत एआई मॉडल के सामने आने से साइबर सुरक्षा की दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इसे बनाने वाली कंपनी Anthropic ने इसकी क्षमताओं को देखते हुए आम लोगों के लिए इसकी पहुंच सीमित कर दी है, क्योंकि यह मॉडल स्वायत्त रूप से ऑपरेटिंग सिस्टम और पुराने सॉफ्टवेयर तक का गहराई से ऑडिट कर सकता है।इस एआई की खासियत यह है कि यह बड़े पैमाने पर सॉफ्टवेयर में मौजूद बग और कमजोरियों को बहुत तेजी से पहचान सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले सिस्टम्स में हजारों नई खामियां खोजने में सक्षम रहा है। इसका मतलब यह है कि भविष्य में सॉफ्टवेयर को ज्यादा सुरक्षित और बग-फ्री बनाया जा सकता है, लेकिन साथ ही इसका दुरुपयोग भी संभव है।इसी जोखिम को देखते हुए Project Glasswing के तहत इसे सीमित संगठनों के साथ ही साझा किया जा रहा है। इस पहल में Google, Apple, Cisco और CrowdStrike जैसी बड़ी टेक कंपनियां शामिल हैं, जो मिलकर इस तकनीक का परीक्षण और सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करेंगी।विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक साइबर सुरक्षा के पारंपरिक तरीके को पूरी तरह बदल सकती है। अब केवल इंसान ही नहीं, बल्कि एआई खुद ही कमजोरियों को खोजने और ठीक करने या उनका फायदा उठाने में सक्षम होगा। इससे “एआई बनाम एआई” का दौर शुरू हो सकता है, जहां हमले और बचाव दोनों ही मशीनों के जरिए होंगे।
इसलिए, जैसे परमाणु ऊर्जा या विमानन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कड़े नियम होते हैं, वैसे ही एआई के लिए भी मजबूत नियमन और निगरानी की जरूरत महसूस की जा रही है। आने वाले समय में एआई डेवलपर्स, सरकारों और कंपनियों को मिलकर ऐसे ढांचे बनाने होंगे, जिससे इस ताकतवर तकनीक का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
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