केरल से लेकर पंजाब तक कर्ज में डूबे राज्यों की वजह से धीमी पड़ रही विकास की रफ्तार

देश की अर्थव्यवस्था और विकास की रफ्तार को लेकर एक अहम तस्वीर सामने आई है, जिसमें State Bank of India की रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि केंद्र सरकार लगातार राज्यों को विकास के लिए पैसा दे रही है, लेकिन कई राज्य उस पैसे का पूरा और सही उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, जिसकी वजह से विकास की गति धीमी पड़ती नजर आ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ सालों में केंद्र ने राज्यों को इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास कार्यों के लिए बड़े स्तर पर फंड दिया, लेकिन अब राज्यों के बीच इसका उपयोग करने में बड़ा अंतर दिखने लगा है, जहां कुछ राज्य इस पैसे का सही इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं कई राज्य पीछे रह गए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह राज्यों पर बढ़ता कर्ज बताया गया है, क्योंकि जिन राज्यों पर कर्ज ज्यादा है, वहां सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने, कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और सब्सिडी जैसे खर्चों में ही चला जाता है, जिससे नए विकास कार्यों के लिए पैसा बच ही नहीं पाता। खास तौर पर केरल, पंजाब और तेलंगाना जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि यहां कर्ज का स्तर ज्यादा होने से पूंजीगत खर्च यानी कैपेक्स पर असर पड़ा है 

जिसका सीधा मतलब है कि सड़क, पुल, बिजली और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट धीमे हो रहे हैं। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई राज्य अब फ्री योजनाओं या लोगों को सीधे पैसा देने वाली स्कीम्स पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं, जिससे विकास कार्यों के लिए बजट और कम हो जाता है, और यह ट्रेंड झारखंड, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में ज्यादा देखा गया है। एक और महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि केवल केंद्र से पैसा मिलना ही काफी नहीं होता, बल्कि राज्यों को भी उसमें अपना योगदान बढ़ाना जरूरी है, क्योंकि जब राज्य खुद निवेश करते हैं तभी प्रोजेक्ट तेजी से जमीन पर उतरते हैं और उनका असर दिखता है। रिपोर्ट साफ कहती है कि अगर राज्य अपने स्तर पर भी पर्याप्त निवेश बढ़ाएं, तो विकास की रफ्तार कई गुना तेज हो सकती है, लेकिन अभी कई राज्यों में यह कमी साफ नजर आ रही है। साथ ही यह भी देखा गया है कि जिन फंड्स को किसी खास काम से जोड़कर दिया जाता है, उनका इस्तेमाल ज्यादा प्रभावी होता है, जबकि बिना शर्त वाले फंड कई बार दूसरे खर्चों में चले जाते हैं, जिससे असली विकास कार्य प्रभावित होते हैं। कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट एक तरह से चेतावनी देती है कि अगर राज्य सरकारें कर्ज का बोझ कम करने और विकास में निवेश बढ़ाने पर ध्यान नहीं देतीं, तो देश की समग्र विकास रफ्तार पर असर पड़ सकता है, और आने वाले समय में यह एक बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकती है।


Manisha Saini
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