13,700 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और तिमाही आधार पर इसमें तेज वृद्धि दर्ज की गई, जो इसकी ऑपरेशनल मजबूती को दर्शाता है। बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) भी 4% से ऊपर मजबूत स्तर पर बना हुआ है, जो यह दिखाता है कि बैंक अपनी लेंडिंग और डिपॉजिट लागत के बीच संतुलन अच्छे तरीके से संभाल रहा है। इसके साथ ही, एसेट क्वालिटी में लगातार सुधार, कम होते एनपीए और नियंत्रित प्रावधान खर्च ने बैंक की बैलेंस शीट को और मजबूत बनाया है। ब्रोकरेज हाउसों का मानना है कि आईसीआईसीआई बैंक की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्थिर और संतुलित ग्रोथ है, जहां रिटेल और कॉरपोरेट दोनों सेगमेंट में अच्छा प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में लोन ग्रोथ थोड़ी धीमी रहने के बाद अब इसमें फिर से तेजी के संकेत मिल रहे हैं, जिससे आने वाले समय में बैंक की कमाई में और सुधार हो सकता है।
कुल मिलाकर, दोनों बैंक भारतीय बैंकिंग सेक्टर में मजबूत स्थिति में बने हुए हैं, लेकिन निवेश के नजरिए से उनका फोकस अलग-अलग है—जहां HDFC Bank के लिए आगे का सबसे बड़ा ट्रिगर लोन ग्रोथ में तेजी लाना है, वहीं ICICI Bank बेहतर मार्जिन, मजबूत एसेट क्वालिटी और स्थिर ग्रोथ के दम पर पहले से ही मजबूत स्थिति में दिख रहा है और भविष्य में वैल्यूएशन री-रेटिंग का बड़ा दावेदार माना जा रहा है, जिससे निवेशकों की नजर दोनों बैंकों पर बनी हुई है लेकिन आईसीआईसीआई बैंक फिलहाल थोड़ी बढ़त लेता हुआ नजर आता है।
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