केंद्र सरकार ने पान मसाला जैसे उत्पादों पर नया 40% स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा सेस लगाने का प्रस्ताव रखा है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन जुटाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का तर्क है कि पान मसाला, गुटका और इसी श्रेणी के उत्पाद चिकित्सा क्षेत्र पर भारी बोझ डालते हैं—क्योंकि इनसे जुड़ी कैंसर, मुख रोग, श्वसन समस्याएँ और कई गंभीर बीमारियाँ सरकारी व निजी अस्पतालों पर अत्यधिक दबाव बनाती हैं। ऐसी स्थितियों में स्वास्थ्य ढाँचे को अतिरिक्त पैसे की आवश्यकता होती है, जिसे यह सेस पूरा करने में मदद करेगा। यह कर सरकार को एक स्थायी फंड उपलब्ध कराएगा, जिसका उपयोग स्वास्थ्य सुविधाओं को आधुनिक बनाने, बीमारियों की रोकथाम के कार्यक्रमों और जन-जागरूकता अभियानों में किया जा सकेगा।
साथ ही सरकार का कहना है कि इस सेस से मिलने वाला राजस्व राष्ट्रीय सुरक्षा फंड को भी मजबूत करेगा, जो देश की सामरिक आवश्यकताओं, सुरक्षा ढांचे और रक्षा-सम्बंधित अवसंरचना के विकास में लगाया जाएगा। इस प्रस्ताव का उद्देश्य सिर्फ राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि जनता को हानिकारक उत्पादों से दूर रखना भी है। ऐसे उत्पादों की खपत पर टैक्स बढ़ाने से उपभोक्ताओं के व्यवहार में परिवर्तन आता है और यह कदम स्वास्थ्य नीति के दृष्टिकोण से अत्यंत प्रभावी माना जाता है। सरकार के अनुसार, यह सेस GST मुआवजा सेस की समाप्ति के बाद उत्पन्न आर्थिक खालीपन को भी भर पाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से दोहरे लाभ मिलेंगे—एक तरफ स्वास्थ्य क्षेत्र को अतिरिक्त सहायता मिलेगी, और दूसरी ओर देश की सुरक्षा और आपदा-प्रबंधन क्षमता को मजबूत आधार प्राप्त होगा। कुल मिलाकर यह प्रस्ताव भारत की सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा स्थिति को दीर्घकालिक रूप से सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण नीति पहल माना जा रहा है।
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