प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जॉर्डन की राजधानी अमान की आधिकारिक यात्रा के दौरान जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय के साथ व्यापक और उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की। यह बैठक भारत–जॉर्डन संबंधों के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि इसी वर्ष दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ भी मनाई जा रही है। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई। वार्ता के दौरान भारत और जॉर्डन ने एक 8-बिंदु रणनीतिक दृष्टिकोण साझा किया, जो भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय करेगा। इस रणनीतिक ढांचे में व्यापार और निवेश, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल नवाचार, स्वास्थ्य एवं फार्मास्यूटिकल सहयोग, अवसंरचना विकास, महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों में साझेदारी, नागरिक परमाणु सहयोग तथा जनसंपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे अहम क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में दीर्घकालिक और व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई।
नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई को लेकर भी स्पष्ट और मजबूत संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा है, और इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और संयुक्त प्रयासों को और सशक्त किया जाना आवश्यक है। इसके साथ ही, दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर नियमित संवाद बनाए रखने पर भी सहमति व्यक्त की।
आर्थिक मोर्चे पर, भारत और जॉर्डन ने निवेश बढ़ाने, निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया। जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, और टिकाऊ विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। कुल मिलाकर, यह बैठक न केवल दोनों देशों के पारंपरिक मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने वाली रही, बल्कि आने वाले वर्षों में भारत–जॉर्डन साझेदारी को एक रणनीतिक और बहुआयामी स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।
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