वर्ष 2025 भारत और विश्व के लिए सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और रचनात्मक विरासत के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ है। इस दौरान UNESCO ने भारत सहित कई देशों के स्थलों, परंपराओं और शहरों को विश्व धरोहर स्थल, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत और क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क के अंतर्गत मान्यता प्रदान की। यह मान्यता न केवल संबंधित देशों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाती है, बल्कि संरक्षण, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करती है।
भारत के लिए यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है क्योंकि देश की विविध सांस्कृतिक परंपराएं, प्राचीन स्थापत्य, लोक कलाएं और जीवनशैली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल परंपराओं से यह संदेश जाता है कि केवल ऐतिहासिक स्मारक ही नहीं, बल्कि लोक ज्ञान, उत्सव, कला और सामाजिक प्रथाएं भी मानव सभ्यता की साझा धरोहर हैं। वहीं क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क में शामिल शहरों को नवाचार, रचनात्मक उद्योग और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का अवसर मिलता है।
वैश्विक स्तर पर भी 2025 की UNESCO मान्यताओं ने सांस्कृतिक विविधता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को रेखांकित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन मान्यताओं से संबंधित स्थलों और परंपराओं के संरक्षण के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी और सतत पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर, 2025 की UNESCO मान्यताएं यह दर्शाती हैं कि दुनिया भर में सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने और अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में वैश्विक प्रयास लगातार मजबूत हो रहे हैं।
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