डॉ. भीमराव अंबेडकर का कथन है, “शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पिएगा वही दहाड़ेगा।” यही संदेश आदित्य अपने बच्चों तक पहुंचा रहे हैं। उनके अनुसार शिक्षा ही ज्ञान, शक्ति और आत्मविश्वास का सबसे बड़ा साधन है।आदित्य का जीवन संघर्षों से भरा रहा। आर्थिक समस्याओं के कारण उन्हें स्कूल से निकाला गया और सातवीं कक्षा में पढ़ाई छोड़नी पड़ी। लेकिन आज आदित्य ने हार नहीं मानी। उन्होंने तीन कोचिंग सेंटर स्थापित किए हैं, जहां करीब 230 बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जा रही है।आदित्य का उद्देश्य सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है। उनका लक्ष्य बच्चों में अच्छे नागरिक बनने और समाज के लिए योगदान देने की भावना पैदा करना है। भविष्य में आदित्य शिक्षा के इस मिशन को और बड़े स्तर पर फैलाने की योजना बना रहे हैं।
