रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के बीच हुए Reciprocal Exchange of Logistics Agreement (RELOS) को औपचारिक रूप से रैटिफाई कर दिया है। इस महत्वपूर्ण रक्षा समझौते के तहत अब दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य इकाइयों, युद्धपोतों और सैन्य विमानों को आवश्यक लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध करा सकेंगे। इसमें ईंधन, मरम्मत, रखरखाव, आपूर्ति और अन्य आवश्यक सेवाएँ शामिल होंगी, जिससे सैन्य अभियानों का संचालन अधिक सुगम और प्रभावी हो सकेगा। इस समझौते से भारत और रूस के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों, आपदा राहत अभियानों, मानवीय सहायता मिशनों और रणनीतिक सैन्य कार्रवाइयों को नई गति मिलेगी। लॉजिस्टिक सहयोग के कारण दोनों देशों की सेनाएँ दूर-दराज के क्षेत्रों में भी बेहतर तालमेल के साथ कार्य कर सकेंगी, जिससे प्रतिक्रिया समय कम होगा और संचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
RELOS समझौता भारत–रूस के बीच दशकों पुराने मजबूत रक्षा और रणनीतिक संबंधों को और गहराई प्रदान करता है। यह दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास, सैन्य समन्वय और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इसके माध्यम से भारत और रूस वैश्विक एवं क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अधिक प्रभावी सहयोग कर सकेंगे।
साथ ही, यह समझौता भारत के आत्मनिर्भर रक्षा अभियान को भी मजबूती प्रदान करता है। अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक सहयोग से संसाधनों का बेहतर और कुशल उपयोग संभव होगा, जबकि संयुक्त अभ्यासों और अभियानों के माध्यम से भारतीय सशस्त्र बलों को आधुनिक संचालन अनुभव और तकनीकी दक्षता प्राप्त होगी। कुल मिलाकर, RELOS भारत की रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने और उसे एक विश्वसनीय रणनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा।
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