14 दिसंबर 2025 को हरियाणा के हिसार में एक महत्वपूर्ण शैक्षिक कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 225 से 250 प्राध्यापक, कुलपति, विश्वविद्यालय प्रमुख और शिक्षाविद शामिल हुए। इस कार्यक्रम में राज्य के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों—चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, गुरु जम्बेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय सहित अनेक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम के दौरान उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, भारतीय ज्ञान परंपरा का पुनर्स्थापन, तथा शिक्षा प्रणाली में नवाचार और अनुसंधान जैसे विषयों पर गहन और विचारोत्तेजक चर्चा हुई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक दृष्टिकोण को भी पाठ्यक्रम और शोध का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव हो सके।
शिक्षाविदों ने तकनीक-आधारित शिक्षण, बहु-विषयक अध्ययन, स्टार्टअप और उद्योग से जुड़ी शिक्षा, तथा अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में विश्वविद्यालयों को केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान न रहकर ज्ञान सृजन, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन के केंद्र के रूप में कार्य करना होगा। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने सभी शैक्षणिक संस्थानों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षकों को छात्रों में राष्ट्रबोध, आत्मनिर्भरता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। कुल मिलाकर, यह आयोजन उच्च शिक्षा के भविष्य को नई दिशा देने और शिक्षाविदों के बीच सहयोग व संवाद को मजबूत करने वाला सिद्ध हुआ।
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