जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र के एमजीडी गांव के किसान दिलीप सिंह गहलोत ने कठिन जलवायु परिस्थितियों के बीच गेहूं की एक नई और उन्नत किस्म ‘DG-II’ विकसित कर एक मिसाल पेश की है, जो सामान्य किस्मों की तुलना में लगभग दोगुनी पैदावार देने की क्षमता रखती है। उन्होंने वर्ष 2012 में एचडी, कल्याण सोना, लोकमान और 3765 जैसी प्रचलित किस्मों के बीजों पर प्रयोग शुरू किया, जिसमें बीजों को 10,000 गॉस क्षमता वाले नियोडिमियम चुंबक से प्रभावित पानी में 24 घंटे तक भिगोकर बोया गया। इसके बाद उन्होंने कई वर्षों तक लगातार चयन प्रक्रिया अपनाते हुए केवल उन पौधों के बीज चुने, जिनकी जड़ें मजबूत, तना सशक्त और बालियां लंबी थीं। इस मेहनत के परिणामस्वरूप DG-II किस्म सामने आई, जिसकी बालियां 9 से 11 इंच लंबी पाई गईं, जबकि सामान्य गेहूं में यह 3 से 4 इंच ही होती है, साथ ही पौधों की ऊंचाई 3 से 4 फीट होने के कारण तेज हवा में गिरने का खतरा भी कम रहता है। इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह कम पानी और खारे पानी वाली भूमि में भी अच्छी पैदावार दे सकती है, जिससे राजस्थान और गुजरात जैसे शुष्क क्षेत्रों के किसानों के लिए यह बेहद लाभकारी साबित हो सकती है। हालांकि अभी इस किस्म को वैज्ञानिक संस्थानों से आधिकारिक मान्यता मिलना बाकी है, लेकिन यदि इसे पंजीकरण और स्वीकृति मिल जाती है, तो यह न केवल गेहूं उत्पादन को नई दिशा देगी, बल्कि लाखों किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और यह साबित करेगी कि नवाचार केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं, बल्कि खेतों में भी संभव है।