भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की दिशा में ISRO ने एक और निर्णायक सफलता हासिल की है। चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) में ड्रोग पैराशूट का स्लेज परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिसने मिशन की तकनीकी मजबूती को नई पुष्टि दी है। रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज के माध्यम से लगभग 600 किलोमीटर प्रति घंटे की अत्यधिक गति पर किए गए इन परीक्षणों का उद्देश्य चरम परिस्थितियों में पैराशूट की विश्वसनीयता, स्थिरता और प्रदर्शन का आकलन करना था। परीक्षणों में यह सिद्ध हुआ कि ड्रोग पैराशूट क्रू मॉड्यूल की गति को सुरक्षित रूप से कम करने, उसे स्थिर बनाए रखने और अंतिम लैंडिंग से पहले आवश्यक नियंत्रण प्रदान करने में पूरी तरह सक्षम है। यह चरण अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वायुमंडल में पुनः प्रवेश के दौरान क्रू मॉड्यूल को अत्यधिक ताप, दबाव और वेग का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस सफलता से 2026 में प्रस्तावित गगनयान मिशन की तैयारियों को ठोस आधार मिला है। यह उपलब्धि न केवल भारत की स्वदेशी अंतरिक्ष तकनीक की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि मानव अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी सशक्त करती है। गगनयान मिशन भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो अपने दम पर मानव को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता रखते हैं।
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