स्वदेशी शोध संस्थान के ज्ञान कुंज परिसर में तुलसी दिवस के पावन अवसर पर श्रद्धा, संस्कृति और आत्मनिर्भरता की भावना से ओतप्रोत भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान से जुड़े सभी शोधार्थियों, कार्यकर्ताओं और अतिथियों ने तुलसी माता की विधिवत पूजा-अर्चना, दीप प्रज्वलन तथा परिक्रमा कर भारतीय परंपरा और प्रकृति-आधारित जीवन मूल्यों के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की। पूरे परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, दीपों की रोशनी और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण व्याप्त रहा, जिसने कार्यक्रम को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन और स्वदेशी चेतना को सशक्त करने वाला अवसर भी सिद्ध हुआ।
आयोजकों और वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि तुलसी केवल एक औषधीय पौधा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और स्वदेशी जीवनशैली का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में तुलसी का विशेष स्थान रहा है, जो आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूती प्रदान करता है। इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आत्मनिर्भर भारत का निर्माण प्रकृति-सम्मत सोच, स्थानीय संसाधनों के उपयोग और स्वदेशी ज्ञान परंपरा को अपनाने से ही संभव है। कार्यक्रम के दौरान प्रकृति, आस्था और आत्मनिर्भरता का सुंदर संगम देखने को मिला, जिसने सभी प्रतिभागियों को भारतीय परंपराओं से पुनः जुड़ने, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनने और स्वदेशी मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने की गहरी प्रेरणा दी।
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