डांग दरबार: आदिवासी जीवन, स्वावलंबन और स्वदेशी संस्कृति का अनोखा पर्व

डांग दरबार गुजरात के दक्षिण में स्थित डांग जिले का एक प्रमुख आदिवासी सांस्कृतिक उत्सव है, जो यहां की समृद्ध लोक परंपराओं, स्वदेशी जीवनशैली और स्वावलंबन की भावना को दर्शाता है। इस मेले में डांग क्षेत्र के लगभग 311 गांवों से आदिवासी समुदाय के लोग एकत्रित होते हैं, जिससे यह एक विशाल और जीवंत आयोजन बन जाता है। पाँच दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विशेष झलक देखने को मिलती है। हर दिन भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, जिनमें डांग के पारंपरिक राजा (नायक) की शाही सवारी विशेष आकर्षण होती है। मेले में लगे स्टॉल स्वदेशी वस्तुओं, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देते हैं, जो स्वावलंबन की भावना को मजबूत करते हैं। ऐतिहासिक रूप से, यह परंपरा अंग्रेजों के समय से जुड़ी है जब 1842 के बाद ब्रिटिश सरकार ने डांग के पाँच आदिवासी राजाओं के साथ संधि कर उन्हें जंगलों के उपयोग के बदले वार्षिक भत्ता देना शुरू किया था, और उसी के वितरण के लिए “दरबार” आयोजित किया जाता था। यही परंपरा आज “डांग दरबार” के रूप में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पर्व बन गई है, जिसे गुजरात सरकार आज भी बड़े उत्साह और गरिमा के साथ आयोजित करती है।

Vivek Kankate
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