कार्यक्रम में भारी संख्या में युवाओं और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दौड़ की शुरुआत से पहले विवेकानंद जी के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया। मंच के वक्ताओं ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा किआत्मनिर्भर भारतके सपने को साकार करने के लिए स्वदेशी उत्पादों का उपयोग और भारतीय मूल्यों को अपनाना अनिवार्य है। यह दौड़ केवल शारीरिक स्वास्थ्य का प्रतीक नहीं थी, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण और स्वदेशी के प्रति जागरूकता फैलाने का एक सशक्त माध्यम बनी। अंत में, सभी प्रतिभागियों ने देश की आर्थिक उन्नति के लिए स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग कासामूहिक संकल्पलिया