कुरुक्षेत्र, 19 मार्च 2026।
देशभर में हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का स्वागत बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ किया जा रहा है। इसी क्रम में स्वदेशी जागरण मंच, कुरुक्षेत्र के सौजन्य से प्रेरणावृद्ध आश्रम (हरिकेश पपोसा) में नववर्ष का शुभारंभ विधि-विधान से हवन कर किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक व धार्मिक वातावरण देखने को मिला।
आश्रम के संस्थापक डॉ. जय भगवान सिंगला ने बताया कि आज से चैत्र नवरात्रि का भी पावन आरंभ हो गया है, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में हर शुभ कार्य की शुरुआत हवन से होती है, जो न केवल आध्यात्मिक शुद्धि देता है बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी है।
स्वदेशी जागरण मंच के प्रांत संयोजक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश ने नव संवत्सर की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस वर्ष विक्रम संवत 2083 में 13 महीने होंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार ज्येष्ठ मास दो बार आएगा (अधिक मास), जो 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक रहेगा। साथ ही उन्होंने बताया कि इस संवत्सर, जिसका नाम ‘रौद्र’ है, में देवगुरु बृहस्पति ‘राजा’ और मंगल ‘मंत्री’ के रूप में माने जा रहे हैं, जो धार्मिक व आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि के संकेत हैं ।
कार्यक्रम में हरिकेश पपोसा ने कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन सृष्टि की रचना का प्रारंभ हुआ था, इसलिए इसे ‘नव संवत्सर’ के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि इस समय प्रकृति भी नवजीवन का संदेश देती है—पेड़ों पर नए पत्ते आते हैं और वातावरण में नई ऊर्जा का संचार होता है।
इस अवसर पर ताराचंद और गगनदीप ने कहा कि हिंदू नववर्ष को देशभर में विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा, दक्षिण भारत में उगादी और उत्तर भारत में चैत्र नवरात्रि एवं नव संवत्सर के रूप में मनाया जाता है।
कार्यक्रम में प्रेरणा वृद्ध आश्रम में रहने वाले सभी वृद्धों ने बड़े उत्साह के साथ सक्रिय भागीदारी रही, जिससे पूरे वातावरण में उत्साह और आस्था का सुंदर संगम देखने को मिला।
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