गायत्री का जीवन संघर्ष भरा रहा — उनके पिता टायर पंक्चर की दुकान और चाय की दुकान चलाते थे, और घर की आर्थिक स्थिति इतनी कठिन थी कि रोज़मर्रा की खुशहाली और कोचिंग फीस के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ती थी।
उनकी यह सफलता तीसरे प्रयास में हासिल हुई है पहले प्रयास में उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं की थी और दूसरे प्रयास में मुख्य परीक्षा तक पहुंँचीं लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका।
परिवार की आर्थिक चुनौतियों और कठिन संघर्षों के बावजूद गायत्री ने दृढ़ निश्चय के साथ पढ़ाई जारी रखी और ऑनलाइन संसाधनों से तैयारी की, जिससे आज वह उस मुक़ाम पर पहुंची हैं जहाँ उनके शहर और परिवार को गर्व है।यह कहानी न केवल एक युवती की सफलता की है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का संदेश भी देती है कि मेहनत, हौसला और परिवार का समर्थन बड़ी उपलब्धियों का रास्ता खोल सकता है
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