मार्कण्डेय पाण्डेय, लखनऊ, अमृत विचार: वर्ष 2026-27 में प्रदेशभर में 35 करोड़ पौधरोपण का महत्वूपर्ण लक्ष्य तय किया गया है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिकीय संतुलन और हरित वातावरण को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत सभी शैक्षिक संस्थान मिलकर कुल 44.2 लाख पौधे लगाएंगे। भारतीय वन सर्वेक्षण-2023 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश का केवल 9.96% क्षेत्र वनावरण और वृक्षावरण से आच्छादित है, लेकिन वर्ष 2021 के मुकाबले 559.19 वर्ग किलोमीटर की वृक्षावरण वृद्धि हुई है, जो पर्यावरणीय सुधार की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय ने अपने संबद्ध संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक संस्थान में कम से कम 500 पौधारोपण किए जाएं। पूरे प्रदेश में 1 जुलाई से 7 जुलाई तक वन महोत्सव मनाया जाएगा, जिसके दौरान सभी विभाग सामुदायिक भूमि, वन भूमि, किसानों की सहमति से कृषि भूमि, नदियों के किनारे, चारागाह भूमि और गौवंश शेल्टर की रिक्त भूमि पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित करेंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पौधों की उपलब्धता, नर्सरी में अंकुरण और थैला भराई का कार्य समयबद्ध रूप से संपन्न हो।
पौधरोपण में स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी। कुल पौधरोपण में 20% फलदार वृक्ष होंगे, इसके अलावा नीम, पाकड़, पीपल, बरगद, अर्जुन, और पारिस्थितिकीय महत्व वाले चंदन, खजूर, काला शीशम, गम्हार आदि पौधे लगाए जाएंगे। शिक्षा विभाग के तहत प्राथमिक शिक्षा में 12.43 लाख, माध्यमिक शिक्षा में 7.63 लाख, उच्च शिक्षा में 18.54 लाख, और प्राविधिक शिक्षा में 5.06 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा।
यह व्यापक पहल न केवल प्रदेश के वनावरण और हरित क्षेत्र को बढ़ाएगी, बल्कि स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण, फलदायक वृक्षों के प्रसार और पर्यावरणीय स्थिरता को भी मजबूती प्रदान करेगी। इसके साथ ही यह शैक्षिक संस्थानों, सरकारी विभागों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से पूरे प्रदेश में हरित और स्वस्थ जीवन शैली को प्रोत्साहित करने वाला एक ऐतिहासिक कदम है।
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