'सरकारी बोर्ड से पुजारियों की नियुक्ति सेक्युलर काम नहीं तमिलनाडु सरकार पर केंद्र का निशाना

केंद्र सरकार ने तमिलनाडु में सरकारी बोर्डों के माध्यम से पुजारियों (अर्चकों) की नियुक्ति को लेकर DMK सरकार पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस मामले में अर्चकों की नियुक्ति को गलत तरीके से “सेक्युलर काम” बताया था, जबकि यह पूरी तरह से धार्मिक और आस्था से जुड़ा फैसला है।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पिछले कुछ दशकों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाए गए न्यायशास्त्र की समीक्षा करने की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि इसमें धर्म, आस्था और विश्वास से जुड़े मुद्दों की जटिलताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। SG ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिमी न्यायशास्त्र के अनुकरण में व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सामाजिक विवेक और नैतिकता से ऊपर रखने की प्रवृत्ति रही है, जो इस मामले में उपयुक्त नहीं है।

केंद्र सरकार का रुख स्पष्ट है कि मंदिरों में अर्चकों की नियुक्ति धार्मिक अधिकारों का हिस्सा है और इसे सरकारी बोर्डों के माध्यम से नियंत्रित करने का कानून विवादास्पद है। SG मेहता ने इस कानून को लागू रखने की वकालत की, जिसमें नियुक्तियों का नियंत्रण सरकारी बोर्डों को सौंपा गया है, ताकि धर्म और आस्था से जुड़े निर्णयों में न्यायपालिका का अनावश्यक दखल न हो।

इस विवाद ने एक बार फिर धर्म, राज्य और न्यायपालिका के बीच संतुलन और सीमा पर बहस को जोर दिया है।


Manisha Saini
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