वैश्विक स्तर पर renewable energy (नवीकरणीय ऊर्जा) में निवेश लगातार बढ़ रहा है, जिससे साफ है कि दुनिया तेजी से साफ और टिकाऊ ऊर्जा प्रणाली की ओर बढ़ रही है। हाल की रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में ऊर्जा परिवर्तन (energy transition) में निवेश रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और करीब 2.3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रकम clean energy सेक्टर—जैसे सौर ऊर्जा (solar), पवन ऊर्जा (wind), बैटरी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इंफ्रास्ट्रक्चर—में लगाई गई। यह दिखाता है कि अब ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का बड़ा हिस्सा जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) की बजाय कम-कार्बन और हरित तकनीकों की ओर जा रहा है।
इस बढ़ते निवेश के पीछे कई कारण हैं, जैसे जलवायु परिवर्तन (climate change) से निपटने की जरूरत, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और नई तकनीकों की लागत में कमी। खासकर सौर और पवन ऊर्जा सस्ती होने के कारण ज्यादा लोकप्रिय हो रही हैं, जिससे सरकारें और कंपनियां इसमें तेजी से निवेश कर रही हैं। कई देशों ने शून्य कार्बन उत्सर्जन (net-zero emissions) का लक्ष्य भी तय किया है, जिससे इन परियोजनाओं को नीति और वित्तीय समर्थन मिल रहा है। चीन, अमेरिका, भारत और यूरोप जैसे बड़े देश इस क्षेत्र में आगे हैं और भारत में भी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ रही है।
हालांकि कुछ चुनौतियां अभी भी हैं, जैसे विकासशील देशों में निवेश की कमी, नियमों में देरी और शुरुआती लागत ज्यादा होना। इसके बावजूद कुल मिलाकर रुझान सकारात्मक है और विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में निवेश और तेजी से बढ़ेगा। साफ है कि नवीकरणीय ऊर्जा अब भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की सबसे अहम जरूरत और निवेश का बड़ा क्षेत्र बन चुकी है, जो पर्यावरण के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद है।
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