भारत ने थोरियम आधारित न्यूक्लियर ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स में 500 मेगावॉट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल को ‘पहली क्रिटिकलिटी’ हासिल कर ली, जो इस बात का संकेत है कि रिएक्टर में नियंत्रित परमाणु विखंडन प्रक्रिया सफलतापूर्वक शुरू हो चुकी है। यह रिएक्टर खास इसलिए है क्योंकि यह जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक ईंधन पैदा करने की क्षमता रखता है और भविष्य में लाखों घरों को बिजली उपलब्ध कराने में सक्षम होगा।
भारत की तीन-चरणीय न्यूक्लियर रणनीति में यह दूसरा महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहां प्लूटोनियम आधारित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के जरिए आगे थोरियम से यूरेनियम-233 तैयार करने का मार्ग प्रशस्त होता है। देश के पास दुनिया के लगभग 25% थोरियम भंडार हैं, जबकि यूरेनियम सीमित मात्रा में उपलब्ध है, इसलिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए थोरियम पर फोकस बढ़ाना बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि थोरियम आधारित ऊर्जा का व्यापक उपयोग अभी समय ले सकता है, लेकिन PFBR की सफलता ने भारत के न्यूक्लियर भविष्य को नई दिशा और मजबूती जरूर दी है।
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