ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रिज़र्व बैंक की चिंताएँ बढ़ गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 तक कच्चे तेल की कीमतें $80-85 प्रति बैरल के आसपास बनी रह सकती हैं, जो भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए महंगाई बढ़ाने वाला बड़ा कारण बनेगा। इससे न केवल पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे बल्कि ट्रांसपोर्ट और रोज़मर्रा की वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि होगी। अलग-अलग संस्थाओं जैसे S&P Global Ratings, Goldman Sachs और Moody's ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर अलग-अलग अनुमान दिए हैं, जिससे भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। वहीं महंगाई 4.3% से 4.8% तक रहने की संभावना है, जो RBI के लक्ष्य के करीब या उससे ऊपर जा सकती है। इस स्थिति में RBI को आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाना होगा, जबकि रुपये की कमजोरी और बढ़ते आयात खर्च स्थिति को और कठिन बना रहे हैं। ऐसे हालात में भारत सहित अन्य इमर्जिंग मार्केट्स में Stagflation का खतरा भी बढ़ रहा है, जिसमें ग्रोथ धीमी और महंगाई ऊँची रहती है।
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