नई दिल्ली: महिला आरक्षण कानून में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर विपक्षी दलों ने साझा रुख तय करने के लिए 15 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाने का फैसला किया है। इस बैठक का उद्देश्य संसद में इस मुद्दे पर एकजुट रणनीति तैयार करना है।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने प्रस्तावित संशोधनों को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं दिखाई है और सभी राजनीतिक दलों के साथ विस्तृत चर्चा भी नहीं की गई है। इस वजह से विपक्षी दल इस मुद्दे पर स्पष्टता और संवाद की मांग कर रहे हैं।
विशेष रूप से Indian National Congress ने 2026 की जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया को महिला आरक्षण कानून से जोड़ने का विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि इससे कानून के लागू होने में अनावश्यक देरी हो सकती है, जो महिलाओं के प्रतिनिधित्व को और टाल देगा।
विपक्षी दलों का मानना है कि सरकार को पहले संशोधनों का पूरा विवरण सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि सभी पक्षों की सहमति से इस पर निर्णय लिया जा सके। इसके लिए वे संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह अपनी रणनीति को मजबूत करने की तैयारी कर रहे हैं।
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