नई दिल्ली/पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी सक्रिय वापसी का संकेत दिया है। उनके इस कदम को बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है और इसे संभावित सत्ता परिवर्तन से भी जोड़ा जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह कदम मुख्यमंत्री पद से उनकी संभावित विदाई का संकेत हो सकता है। ऐसे में बिहार में नई नेतृत्व व्यवस्था को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं और सत्ता समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक क्षमता की सराहना की। वहीं, हरिवंश ने भी लगातार तीसरी बार राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर अपनी मजबूत राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई।
विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश कुमार की दिल्ली में सक्रिय भूमिका आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर नई राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधनों को प्रभावित कर सकती है। इससे केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर राजनीति में नई दिशा देखने को मिल सकती है।
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