नई दिल्ली: भारत के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru ने वर्ष 1959 में ही इज़राइल की सहकारी व्यवस्था, विशेषकर कृषि मॉडल को लेकर गहरी रुचि दिखाई थी। यह उस समय की बात है जब भारत और इज़राइल के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध भी स्थापित नहीं हुए थे।
नेहरू ने अपने सामुदायिक विकास मंत्री S. K. Dey को लिखे एक पत्र में सुझाव दिया था कि भारत को एक छोटा प्रतिनिधिमंडल इज़राइल भेजना चाहिए। इस प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य वहां की सहकारी खेती और सामुदायिक विकास के तरीकों का अध्ययन करना था, ताकि उन्हें भारत में लागू किया जा सके।
गौरतलब है कि भारत ने 1947 में इज़राइल के गठन के खिलाफ मतदान किया था, फिर भी नेहरू का यह कदम उनकी व्यावहारिक सोच और विकास के प्रति खुले दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से सीख लेकर देश के विकास की दिशा तय करने पर जोर दिया।
इस पहल का भारतीय समाजवादी नेताओं पर गहरा प्रभाव पड़ा और इससे देश में सहकारी समितियों, कृषि सुधारों तथा ग्रामीण विकास को लेकर शुरुआती बहसों और नीतियों को नई दिशा मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सोच आगे चलकर भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक बनी।
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