पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर पड़ रहा है। इस चुनौती को देखते हुए Narendra Modi ने राज्यों के साथ बैठक कर ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर दिया और “टीम इंडिया” के रूप में मिलकर काम करने का आह्वान किया। इसी दिशा में GOBARdhan Scheme जैसी पहलें महत्वपूर्ण बनकर उभरी हैं, जिनका उद्देश्य गोबर और कृषि अपशिष्ट को बायोगैस, बायो-CNG और जैविक खाद में बदलकर “वेस्ट टू वेल्थ” मॉडल को बढ़ावा देना है। यह योजना न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करती है, बल्कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और मीथेन उत्सर्जन में कमी लाने में भी सहायक है। इसके अलावा भारत ने एथेनॉल मिश्रण को 20% तक पहुंचाने, ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देने, इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने तथा सौर, पवन और प्राकृतिक गैस जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्य इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, जबकि राजस्थान, मध्य प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्य तेजी से उभर रहे हैं। इस प्रकार, वैश्विक संकट ने भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने और स्वच्छ, टिकाऊ ऊर्जा की ओर संक्रमण को तेज करने का अवसर प्रदान किया है।
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