भारत ने मार्च 2026 में रूस से कच्चे तेल की खरीद में अचानक बड़ा इजाफा करते हुए अपनी ऊर्जा रणनीति में अहम बदलाव का संकेत दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश का कुल आयात बढ़कर करीब 5.3 अरब यूरो तक पहुंच गया, जो पहले के मुकाबले कई गुना अधिक है। इस तेज बढ़ोतरी की मुख्य वजह कच्चे तेल की खरीद की मात्रा का लगभग दोगुना हो जाना और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों का बढ़ना रहा है। फरवरी महीने में गिरावट के बाद मार्च में भारत ने फिर से Russia से बड़े पैमाने पर तेल खरीदना शुरू किया और वह रूस से तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया।
इस बढ़ोतरी के पीछे एक और अहम कारण अमेरिका द्वारा कुछ समय के लिए प्रतिबंधों में दी गई छूट भी मानी जा रही है, जिसके बाद सरकारी रिफाइनरियों ने दोबारा रूस से तेल खरीदना शुरू कर दिया। इससे आयात में तेजी आई और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने सस्ते और आसानी से उपलब्ध कच्चे तेल का लाभ उठाते हुए यह कदम उठाया है, ताकि घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों को संतुलित रखा जा सके और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। कुल मिलाकर, यह साफ है कि बदलते वैश्विक हालात के बीच भारत अपनी जरूरतों और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए लचीली और व्यावहारिक ऊर्जा नीति अपना रहा है, जिससे आने वाले समय में भी ऐसे फैसले देखने को मिल सकते हैं।
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