13 हजार सैनिक और 17 F-16 फाइटर जेट किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर तैनात किए गए हैं, जो दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने का संकेत है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब ईरान और सऊदी के बीच तनाव बढ़ा हुआ है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ गई है।
इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात द्वारा कर्ज वापस मांगने से पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा, लेकिन सऊदी अरब ने 3 अरब डॉलर की वित्तीय मदद देकर उसे राहत दी। यह मदद पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और यूएई का कर्ज चुकाने में अहम मानी जा रही है। शहबाज शरीफ का प्रस्तावित सऊदी दौरा भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहां वे कूटनीतिक समर्थन और क्षेत्रीय शांति के प्रयासों पर चर्चा कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम दिखाता है कि पाकिस्तान एक तरफ अपनी सैन्य साझेदारी मजबूत कर रहा है, तो दूसरी ओर आर्थिक संकट से उबरने के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर भी बना हुआ है। वहीं, ईरान-सऊदी तनाव के बीच इस कदम से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान भविष्य में किसी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का हिस्सा बन सकता है।
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