इस योजना के तहत लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर अधिकतम 850 तक करने का प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों दोनों को शामिल किया जाएगा। इन सीटों में से एक-तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी और यह आरक्षण रोटेशन सिस्टम के आधार पर लागू किया जाएगा, यानी हर चुनाव में अलग-अलग सीटें महिलाओं के लिए निर्धारित की जा सकती हैं।
परिसीमन की प्रक्रिया नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर की जाएगी, जिसके लिए एक विशेष आयोग गठित किया जाएगा। इस आयोग में सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश, चुनाव आयोग के अधिकारी और राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, और इसका फैसला अंतिम माना जाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि पिछली बार 2002 में हुए परिसीमन में केवल सीटों की सीमाएं बदली गई थीं, लेकिन उनकी संख्या में कोई वृद्धि नहीं की गई थी।
अब प्रस्तावित बदलावों के बाद कई राज्यों में विधानसभा सीटों की संख्या काफी बढ़ सकती है, जो Article 170 of the Indian Constitution के तहत तय सीमा से अधिक हो सकती है। ऐसे में सरकार को या तो एक और संविधान संशोधन करना होगा या कोई वैकल्पिक समाधान निकालना पड़ेगा। कुल मिलाकर, यह विशेष सत्र देश की राजनीतिक संरचना में बड़े और ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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