ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री मार्ग के बंद होने से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस सप्लाई प्रभावित हो गई है। यह रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, इसलिए इसके बंद होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ने लगी हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि अमेरिका की सख्त रणनीति, जिसे डोनाल्ड ट्रंप ने अपनाया, अब उल्टा असर दिखा रही है और संकट और गहरा गया है।
इस ऊर्जा संकट का असर केवल पेट्रोल-डीजल की कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। जेट फ्यूल की कमी से हवाई यात्रा महंगी हो सकती है, उर्वरक की कमी से खेती और खाद्य उत्पादन प्रभावित हो सकता है, और हीलियम जैसी गैस की कमी से सेमीकंडक्टर उद्योग पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो महंगाई बढ़ेगी और कई देशों की आर्थिक विकास दर धीमी पड़ सकती है।
International Energy Agency के प्रमुख Fatih Birol ने इसे इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा सुरक्षा संकटों में से एक बताया है और चेतावनी दी है कि यह स्थिति 1970 के दशक के तेल संकट से भी ज्यादा गंभीर हो सकती है। कुल मिलाकर, होर्मुज संकट ने दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, जहां कूटनीतिक समाधान ही इस संकट से निकलने का सबसे अहम रास्ता माना जा रहा है।
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