पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उससे पैदा हुए वैश्विक तेल संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ‘इंडिया फर्स्ट’ नीति पर मजबूती से कायम रहने का फैसला किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने रणनीतिक तेल भंडार को फिलहाल जारी नहीं करेगी, क्योंकि इन भंडारों का उपयोग केवल आपात स्थिति में, यानी जब देश में तेल की आपूर्ति गंभीर रूप से बाधित हो जाए, तभी किया जाएगा। वर्तमान हालात में भारत के पास पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, जिससे घरेलू मांग को बिना किसी परेशानी के पूरा किया जा सकता है।
इस निर्णय के पीछे सरकार की रणनीति यह है कि अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों के बीच देश के पास सुरक्षित और पर्याप्त ईंधन भंडार बना रहे, ताकि भविष्य में किसी बड़े संकट या आपूर्ति में रुकावट आने पर इसका उपयोग किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के असर को कम करने में भी मदद करेगा।
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