मूडीज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक ऊर्जा कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों पर पड़ रहा है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है। Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited जैसी बड़ी कंपनियों को कच्चे तेल की बढ़ती लागत का बोझ खुद उठाना पड़ रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल 2022 से पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम लगभग स्थिर बने हुए हैं, जबकि इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
सरकार के प्रभाव के कारण कंपनियां बढ़ी हुई लागत को समय पर उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा पातीं, जिससे उनके विपणन मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है और मुनाफा कम हो जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि कंपनियों की कमाई और नकदी प्रवाह दोनों पर दबाव बनता है, जिससे उनके रोजमर्रा के ऑपरेशन और भविष्य की योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लंबे समय तक यही स्थिति बनी रहती है, तो इन कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन में कमजोरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, सरकार का मकसद आम जनता को महंगाई से राहत देना है, लेकिन इसका बोझ तेल कंपनियों को उठाना पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले समय में कीमतों में बदलाव या नीति में संशोधन की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।