छत्तीसगढ़ के दुर्ग के युवा उद्यमी Ankush Jain ने खेती को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में एक अनोखा और सराहनीय कदम उठाया है। उन्होंने मिट्टी से बना एक खास ‘स्मार्ट कप’ तैयार किया है, जो किसानों के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आया है। यह कप 11 तरह के जैविक तत्वों से बनाया गया है, जिससे यह पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित है। इस नवाचार को तैयार करने में उन्हें करीब चार साल की कड़ी मेहनत और रिसर्च लगी, जिसके बाद भारत सरकार ने इसे पेटेंट भी प्रदान किया।
इस स्मार्ट कप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पौधों की नर्सरी पहले की तुलना में काफी तेजी से तैयार हो जाती है। जहां पारंपरिक तरीकों में नर्सरी तैयार होने में लगभग 30 दिन लगते थे, वहीं अब यह काम सिर्फ 20 दिनों में पूरा हो जाता है। इससे किसानों का समय बचता है और उत्पादन प्रक्रिया तेज होती है। इतना ही नहीं, इस तकनीक के उपयोग से कीटनाशकों की जरूरत भी लगभग आधी रह जाती है, जिससे खेती की लागत कम होती है और फसल अधिक सुरक्षित रहती है।
आज के समय में खेती में प्लास्टिक का बढ़ता इस्तेमाल मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। प्लास्टिक ट्रे और पॉलीथीन का उपयोग लंबे समय तक मिट्टी को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में यह स्मार्ट कप एक बेहतर और टिकाऊ विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है। यह कप उपयोग के बाद खुद ही मिट्टी में मिल जाता है और किसी तरह का प्रदूषण नहीं फैलाता।
इस नवाचार से न केवल पर्यावरण की रक्षा हो रही है, बल्कि किसानों को भी आर्थिक रूप से फायदा मिल रहा है। कम लागत, बेहतर उत्पादन और तेज नर्सरी तैयार होने जैसी खूबियों के कारण यह तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो सकती है। आने वाले समय में यह स्मार्ट कप खेती के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकता है और भारत को टिकाऊ कृषि की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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