नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन को लेकर योगी आदित्यनाथ ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि प्रदेश में श्रमिकों के अधिकार, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही या उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने खास तौर पर गौतमबुद्ध नगर की स्थिति पर ध्यान देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो लोग वास्तविक श्रमिक नहीं हैं लेकिन हिंसा, आगजनी या अशांति फैलाने में शामिल हैं, उनकी पहचान कर तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए। जांच में सामने आया कि गिरफ्तार 66 लोगों में से 45 असली मजदूर नहीं थे, जिससे “बाहरी तत्वों” की भूमिका स्पष्ट होती है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ऐसे शरारती तत्वों को बेनकाब करने के लिए जरूरत पड़ने पर उनकी तस्वीरें सार्वजनिक स्थानों पर लगाई जाएं, ताकि लोगों को सच्चाई पता चल सके।
इसके साथ ही उन्होंने अफवाह फैलाने वालों और भड़काने वाले संगठनों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाने के निर्देश दिए और सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ाने को कहा। श्रमिकों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए मैनपावर सप्लाई एजेंसियों की व्यापक जांच, ग्रीवांस सेल की अनिवार्य स्थापना, समय पर वेतन, बीमा और अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। उन्होंने श्रमिकों के लिए सस्ते आवास, डॉरमेट्री, बेहतर भोजन व्यवस्था और बच्चों की शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं को भी प्राथमिकता देने को कहा। पुलिस प्रशासन को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि श्रमिकों की आड़ में कोई अराजक तत्व औद्योगिक इकाइयों में प्रवेश न कर सके। सरकार के अनुसार अब स्थिति लगभग सामान्य हो चुकी है और बढ़े हुए वेतन का लाभ 1 अप्रैल से सभी श्रमिकों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
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