Swami Prasad Maurya ने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे एक सकारात्मक और जरूरी कदम बताया है, लेकिन साथ ही उन्होंने इसे और ज्यादा प्रभावी और न्यायसंगत बनाने के लिए एक अहम मांग भी उठाई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना सराहनीय है, लेकिन अगर इसमें सभी वर्गों की महिलाओं को बराबरी से भागीदारी नहीं दी गई, तो इसका पूरा लाभ समाज तक नहीं पहुंच पाएगा। मौर्य ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण के भीतर उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, ताकि यह व्यवस्था वास्तव में समावेशी बन सके।
मैनपुरी दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण लागू करते समय किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए और यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि समाज के हर वर्ग की महिलाओं को समान अवसर मिले। उन्होंने यह भी कहा कि केवल आरक्षण का प्रावधान कर देना ही काफी नहीं है, बल्कि उसका सही तरीके से क्रियान्वयन होना और जमीनी स्तर पर उसका लाभ पहुंचना भी उतना ही जरूरी है। अगर आरक्षण का लाभ सीमित वर्ग तक ही रह गया, तो इसका उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि महिला सशक्तीकरण का असली मकसद तभी पूरा होगा जब हर वर्ग की महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल हों और उन्हें राजनीतिक व सामाजिक स्तर पर बराबरी का मौका मिले। कुल मिलाकर, मौर्य ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए यह स्पष्ट किया कि इसे और ज्यादा संतुलित, समावेशी और प्रभावी बनाने की जरूरत है, ताकि देश की आधी आबादी को वास्तविक रूप से सशक्त किया जा सके और लोकतंत्र में उनकी भागीदारी मजबूत हो सके।