यमुना किनारे कचरा डंपिंग पर एनजीटी सख्त, एमसीडी से मांगी प्रगति रिपोर्ट

National Green Tribunal (NGT) ने पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाते हुए दिल्ली में यमुना नदी के किनारे कचरा फेंकने के मामले में कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। यह मामला खासतौर पर वजीराबाद और जगतपुर इलाके के पास पुश्ता रोड और घाटों पर घरेलू और व्यावसायिक कचरा तथा मलबा डंप किए जाने से जुड़ा है, जिससे नदी और आसपास का पर्यावरण लगातार खराब हो रहा था।

NGT ने इस मामले में Municipal Corporation of Delhi (MCD) से विस्तृत प्रगति रिपोर्ट (हलफनामा) मांगी है, जिसमें यह बताना होगा कि सफाई और निर्माण कार्य कितनी तेजी से हो रहा है और इसे कब तक पूरा किया जाएगा।

MCD की ओर से अदालत में जो रिपोर्ट दी गई, उसमें दावा किया गया कि राम घाट, श्याम घाट, काली घाट और हनुमान चौक जैसे चिन्हित स्थानों से कचरा हटा दिया गया है। साथ ही, कचरे के प्रबंधन के लिए एक “फिक्स्ड कंपैक्टर ट्रांसफर स्टेशन” बनाने की योजना भी तैयार कर ली गई है और इसके लिए कुछ विभागों से अनुमति (NOC) भी मिल चुकी है।

लेकिन याचिकाकर्ता के वकील ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि पूरी तरह सफाई नहीं हुई है। अब NGT ने MCD को निर्देश दिया है कि जिम्मेदार अधिकारी शपथपत्र देकर सच्चाई और काम की प्रगति साफ-साफ बताए। इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई 2026 को होगी।

इसी के साथ NGT ने मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में एक और बड़े पर्यावरणीय मामले पर कार्रवाई की है, जहां कृषि भूमि पर एक अवैध स्टोन क्रशर चल रहा था। ट्रिब्यूनल ने इस पर तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई है और 6 हफ्तों में रिपोर्ट मांगी है।

याचिका में आरोप है कि यह क्रशर बिना किसी जरूरी अनुमति के चल रहा है और इससे वायु व ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है। साथ ही, खेतों, भूजल और लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।


Manisha Saini
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