मार्च 2026 में भारत में महंगाई ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है, जहां थोक महंगाई दर (WPI) बढ़कर 3.88% पर पहुंच गई, जो पिछले तीन सालों का उच्चतम स्तर है। इस बढ़ोतरी के पीछे ईंधन, तेल, मैन्युफैक्चर्ड उत्पादों और कुछ हद तक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी प्रमुख कारण रही है। खासतौर पर ईंधन और बिजली श्रेणी में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जहां महंगाई फरवरी के -3.78% से बढ़कर मार्च में 1.05% हो गई। कच्चे पेट्रोलियम की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया और इसकी महंगाई दर 51% से ज्यादा पहुंच गई, जो वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों को दर्शाती है।
इस उछाल के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, खासकर Iran, Israel और United States के बीच संघर्ष को मुख्य कारण माना जा रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा की तेजी आई है। हालांकि सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई है, लेकिन इसका असर सीमित ही रहा है।
मैन्युफैक्चर्ड उत्पादों की महंगाई भी बढ़कर 3.39% हो गई, जबकि खाद्य महंगाई में हल्की राहत देखने को मिली और यह घटकर 1.90% पर आ गई। वहीं खुदरा महंगाई (CPI) भी बढ़कर 3.4% हो गई, जो यह संकेत देती है कि आने वाले समय में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव और तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं और इसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है।
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